तीन किमी दूर शिफ्टिंग आदेश पर अड़े अधिकारी, अभिभावकों का फूटा गुस्सा
टपूकड़ा क्षेत्र के मायापुर गांव स्थित राजकीय विद्यालय को जर्जर घोषित कर तीन किलोमीटर दूर लादिया गांव शिफ्ट करने के शिक्षा विभाग के आदेश ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। आदेश के विरोध में चौथे दिन भी ग्रामीणों और अभिभावकों का धरना-प्रदर्शन जारी रहा। विरोध स्वरूप मायापुर के करीब 246 बच्चे लगातार चौथे दिन भी स्कूल नहीं गए, जिससे शिक्षा व्यवस्था ठप होने की स्थिति बन गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि लादिया गांव में विद्यालय संचालन के लिए सिर्फ एक-दो कमरे उपलब्ध हैं, जो 246 विद्यार्थियों के लिए पूरी तरह नाकाफी हैं। वहीं, छोटे बच्चों को रोजाना तीन किलोमीटर दूर दूसरे गांव भेजना असुरक्षित और अव्यवहारिक है। अभिभावकों ने इसे बच्चों की सुरक्षा और भविष्य दोनों के लिए खतरा बताया है।
मायापुर में ही उपलब्ध हैं सरकारी भवन
ग्रामीणों ने बताया कि मायापुर गांव में ही अटल सेवा केंद्र में छह कमरे और पंचायत भवन में अतिरिक्त कक्ष उपलब्ध हैं, जहां विद्यालय को अस्थायी रूप से आसानी से संचालित किया जा सकता है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा दूसरे गांव में शिफ्टिंग का आदेश जारी किया गया, जिसे ग्रामीण जनहित के खिलाफ मान रहे हैं।
सीबीईओ कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
विद्यालय शिफ्टिंग के विरोध में मायापुर के ग्रामीण, अभिभावक और जनप्रतिनिधि तिजारा स्थित मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने मांग की कि लादिया गांव शिफ्टिंग का आदेश तत्काल निरस्त किया जाए और मायापुर में ही उपलब्ध सरकारी भवनों में अस्थायी रूप से विद्यालय संचालन की अनुमति दी जाए।
सीबीईओ रमेश मेघ ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामला उच्च अधिकारियों के समक्ष रखा गया है और जल्द समाधान का प्रयास किया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारी का बयान
जिला शिक्षा अधिकारी शाकुंतला मीना ने कहा—
“मामले को गंभीरता से लिया गया है। विद्यालय से संबंधित प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जा रहा है। उच्च स्तर से स्वीकृति मिलते ही समस्या का समाधान किया जाएगा।”
उच्च अधिकारियों से मिलने की तैयारी
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो वे उच्च अधिकारियों से मिलकर आंदोलन को और तेज करेंगे। फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, जबकि 246 बच्चों का भविष्य बीते चार दिनों से फाइलों और आदेशों के बीच उलझा हुआ है।
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